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Muharram Shayari In Hindi | मुहर्रम पर हिंदी शायरियाँ!

Published On: July 6, 2026
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मुहर्रम इस्लामी नए साल का पहला महीना है, जो त्याग, सब्र, इंसानियत और सच्चाई की राह पर डटे रहने का संदेश देता है। इस पवित्र अवसर पर लोग इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की कुर्बानी को याद करते हैं। उनके अदम्य साहस और न्याय के लिए दिए गए बलिदान ने इतिहास में एक ऐसी मिसाल कायम की, जो आज भी लोगों को सत्य और इंसाफ के लिए खड़े होने की प्रेरणा देती है।

अगर आप Muharram Shayari In Hindi की तलाश में हैं, तो यहां आपको दिल को छू लेने वाली बेहतरीन और चुनिंदा शायरियों का संग्रह मिलेगा। इन शायरियों के जरिए आप मुहर्रम की अहमियत, कर्बला की याद और इमाम हुसैन की कुर्बानी को अपने शब्दों में अपनों तक पहुंचा सकते हैं। आप इन्हें WhatsApp, Facebook, Instagram या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर करके इस पावन अवसर की भावनाओं को सम्मानपूर्वक व्यक्त कर सकते हैं।

नीचे दी गई मुहर्रम शायरियां सरल भाषा में लिखी गई हैं, ताकि हर कोई इन्हें आसानी से पढ़ सके, समझ सके और अपने दोस्तों व परिवार के साथ साझा कर सके।

Muharram Shayari in Hindi

Muharram Shayari in Hindi 1

“सजदे से कर्बला को बंदगी मिल गई
सब्र से उम्मत को ज़‍िंदगी मिल गई
एक चमन फातिमा का गुज़रा
मगर सारे इस्लाम को ज़‍िंदगी मिल गई”

“एक दिन बड़े गुरूर से कहने लगी जमीन
है मेरे नसीब में परचम हुसैन का
फिर चाँद ने कहा मेरे सीने के दाग देख
होता है आसमान पर भी मातम हुसैन का”

“कर्बला की जमीं पर खून बहा,
कत्लेआम का मंजर सजा,
दर्द और दुखों से भरा था सारा जहां
लेकिन फौलादी हौसले को शहीद का नाम मिला”

“मुहर्रम पर याद करो वो कुर्बानी,
जो सिखा गया सही अर्थ इस्लामी,
ना डिगा वो हौसलों से अपने,
काटकर सर सिखाई असल जिंदगानी”

Muharram Shayari in Hindi 2

“करीब अल्लाह के आओ तो कोई बात बने,
ईमान फिर से जगाओ तो कोई बात बने,
लहू जो बह गया कर्बला में उनके
मकसद को समझो तो कोई बात बने”

“अपनी तकदीर जगाते हैं तेरे मातम से,
खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से,
अपनी इजहारे-ए-अकीदत का सिलसिला ये है,
हम नया साल मनाते हैं तेरे मातम से”

“क्या हक अदा करेगा ज़माना हुसैन का
अब तक ज़मीन पर कर्ज़ है सजदा हुसैन का
झोली फैलाकर मांग लो मुमीनो
हर दुआ कबूल करेगा दिल हुसैन का”

“जन्नत की आरज़ू में कहां जा रहे हैं लोग
जन्नत तो कर्बला में खरीदी हुसैन ने
दुनिया-ओ-आखरात में जो रहना हो चैन से
जीना अली से सीखो मरना हुसैन से”

Muharram Shayari in Hindi 3

“ख़ुदा की जिस पर रहमत हो वो हुसैन हैं,
जो इंसाफ और सत्य के लिए लड़ जाए वो हुसैन हैं”

“पानी का तलब हो तो एक काम किया कर,
कर्बला के नाम पर एक जाम पिया कर,
दी मुझको हुसैन इब्न अली ने ये नसीहत,
जालिम हो मुकाबिल तो मेरा नाम लिया कर”

“फिर आज हक़ के लिए जान फिदा करे कोई,
वफ़ा भी झूम उठे यूँ वफ़ा करे कोई,
नमाज़ 1400 सालों से इंतजार में है,
हुसैन की तरह मुझे अदा करे कोई”

“कर्बला की कहानी में कत्लेआम था
लेकिन हौसलों के आगे हर कोई गुलाम था,
खुदा के बन्दे ने शहीद की कुर्बानी दी
इसलिए उसका नाम पैगाम बना”

Muharram Shayari in Hindi 4

“एक दिन बड़े गुरूर से कहने लगी ज़मीन,
ऐ मेरे नसीब में परचम हुसैन का,
फिर चाँद ने कहा मेरे सीने के दाग देख,
होता है आसमान पर भी मातम हुसैन का”

“गुरूर टूट गया कोई मर्तबा ना मिला,
सितम के बाद भी कुछ हासिल जफा ना मिला,
सिर-ऐ-हुसैन मिला है यजीद को लेकिन
शिकस्त यह है की फिर भी झुका हुआ ना मिला”

“वो जिसने अपने नाना का वादा वफा कर दिया,
घर का घर सुपुर्द-ए-खुदा कर दिया,
नोश कर लिया जिसने शहादत का जाम,
उस हुसैन इब्न अली को लाखों सलाम”

“आँखों को कोई ख्वाब तो दिखायी दे,
ताबीर में इमाम का जलवा तो दिखायी दे,
ए इब्न-ऐ-मुर्तजा सूरज भी एक छोटा सा जरा दिखायी दे”

Muharram Shayari in Hindi 5

“न हिला पाया वो रब की मैहर को,
भले ही जीत गया वो कायर जंग,
पर जो मौला के डर पर बैखोफ शहीद हुआ,
वही था असली और सच्चा पैगंबर”

“दिल से निकली दुआ है हमारी,
मिले आपको दुनिया में खुशियां सारी,
गम ना दे आपको खुदा कभी,
चाहे तो एक खुशी कम कर दे हमारी,
जन्‍नत की आरज़ू में कहां जा रहे है लोग”

“कर्बला को कर्बला के शहंशाह पर नाज है,
उस नवासे पर मुहम्मद को नाज है,
यूँ तो लाखों सिर झुके सजदे में,
लेकिन हुसैन ने वो सजदा किया जिस पर खुदा को नाज है।”

“हुसैन तेरी अता का चश्मा दिलों के दामन भिगो रहा है,
ये आसमान में उदास बादल तेरी मोहब्बत में रो रहा है,
सबा भी जो गुजरे कर्बला से तो उसे कहता है अर्श वाला,
तू धीरे गुजर यहां मेरा हुसैन सो रहा है”

Muharram Shayari in Hindi 6

“क्या हक़ अदा करेगा ज़माना हुसैन का,
अब तक ज़मीन पे क़र्ज़ है सजदा हुसैन का,
झोली फैला कर मांग लो मोमिनो,
हर दुआ कबूल करेगा दिल हुसैन का”

“अपनी तक़दीर जगाते है तेरे मातम से,
खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से,
अपने इज़हार-ए-अक़ीदत का सिलसिला ये है,
हम नया साल मनाते है तेरे मातम से”

“दश्त-ए-बाला को अर्श का जीना बना दिया,
जंगल को मुहम्मद का मदीना बना दिया,
हर जर्रे को नज़फ का नगीना बना दिया,
हुसैन तुमने मरने को जीना बना दिया”

“सबा भी जो गुजरे कर्बला से तो उसे कहता है अर्थ वाला,
तू धीरे गूजर यहाँ मेरा हुसैन सो रहा है”

Muharram Shayari in Hindi 7

ना पूछ वक़्त की इन बेजुबान किताबों से,
सुनो जब अज़ान तो समझो के हुसैन जिंदा है

“खून से चराग-ए-दीन जलाया हुसैन ने,
रस्म-ए-वफ़ा को खूब निभाया हुसैन ने,
खुद को तो एक बूँद न मिल सका लेकिन,
करबला को खून पिलाया हुसैन ने”

“हुसैन तेरी अता का चश्मा दिलों के दामन भिगो रहा है,
ये आसमान में उदास बादल तेरी मोहब्बत में रो रहा है”

“यूँ ही नहीं जहाँ में चर्चा हुसैन का,
कुछ देख के हुआ था जमाना हुसैन का,
सर दे के जो जहाँ की हुकूमत खरीद ली,
महँगा पड़ा यजीद को सौदा हुसैन का”

Muharram Shayari in Hindi 8

“कर्बला की शहादत इस्लाम बना गयी,
खून तो बहा था लेकिन,
कुर्बानी हौसलों की उड़ान दिखा गयी”

“आँखों को कोई ख्वाब तो दिखायी दे,
ताबीर में इमाम का जलवा तो दिखायी दे,
ए इब्न-ऐ-मुर्तजा सूरज भी,
एक छोटा सा जरा दिखायी दे”

“कर्बला की जमीं पर खून बहा,
कत्लेआम का मंजर सजा,
दर्द और दुखों से भरा था सारा जहां,
लेकिन फौलादी हौसले को शहीद का नाम मिला”

“दश्त-ए-बाला को अर्श का जीना बना दिया,
जंगल को मुहम्मद का मदीना बना दिया,
हर जर्रे को नज़फ का नगीना बना दिया,
हुसैन तुमने मरने को जीना बना दिया”

“खून से चराग-ए-दीन जलाया हुसैन ने,
रस्म-ए-वफ़ा को खूब निभाया हुसैन ने,
खुद को तो एक बूँद न मिल सका लेकिन,
कर्बला को खून पिलाया हुसैन ने”

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Monu Tiwari

Monu Tiwari एक लेखक और शायरी प्रेमी हैं, जिन्हें शब्दों के माध्यम से भावनाओं को व्यक्त करना पसंद है। Shayari Patrika के जरिए वे प्रेम, जीवन, रिश्तों और एहसासों से जुड़ी खूबसूरत शायरी और कविताएँ पाठकों तक पहुँचाते हैं.
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